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कृष्ण जन्माष्टमी पर बच्चों ने दी मनमोहक प्रस्तुति

कृष्ण जन्माष्टमी पर बच्चों ने दी मनमोहक प्रस्तुति

गडहनी। बाल कलाकारों ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कृष्ण लीला की प्रस्तुति देकर भगवान के बाल रूप को मनोहारी बना दिया।कोई मोर मुकुट मुरलीधर के रूप मे दिखा तो कोई राधा रानी की भूमिका मे दिखी।सोमवार को इस मनोहारी त्योहार को घरों मे भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा आराधना की गई साथ ही भगवान के अवतरण पर घंटा शंखनाद ढोल मंजीरा के मधुर ध्वनि मे आरती वंदन की गई। वहीं महिलाओं ने सोहर मांगलिक गीत भजनादि की प्रस्तुति से भगवान का स्वागत वंदन किया।

वहीं इस अवसर पर बच्चों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी।इस अवसर पर बिटिया गोल्डी ने राधा और आयुषी ने कृष्ण की वेशभूषा में अपने को सुसज्जित कर सुमधुर भजन की प्रस्तुति द्वारा सबका मन मोह लिया।बच्चों द्वारा मटकी फोड़ा गया और श्रीकृष्ण के बाल लीलाओं को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।वहीं बच्चों ने बांसुरी सज्जा, कलश सज्जा एवं झूला सज्जा से जुड़ी अपनी अपनी विभिन्न प्रतिभाओं को कला के रूप मे प्रदर्शित किया।अन्त मे उत्क्रमित मध्य माध्यमिक विद्यालय हदियाबाद के प्रधानाध्यापक ओम प्रकाश राय ने बच्चों को श्री कृष्ण के बताए गीता-सार व उनके मूल्यों को अपने जीवन में उतारने का संदेश दिया।श्री राय ने कहा कि अधर्म के विरुद्ध धर्म, अन्याय के विरुद्ध न्याय, असत्य के विरुद्ध सत्य, पाप के विरुद्ध पुण्य, डर के विरुद्ध निडर, बेईमान के विरुद्ध ईमानदार, की लड़ाई में 99 दोषों को माफ कर 100 वें दोषों का इंतजार कर दण्ड देनेवाले यदुकुल नरेश श्रीकृष्ण जन्मोत्सव आज घर घर मनाया जा रहा है।

श्रीकृष्ण भगवान अपने जन्म से लेकर पूरी जिंदगी बेईमानों, अत्याचारियों, पाखंडियों, तानाशाहियों, के विरुद्ध लड़ाई लड़ने वाले का साथ दिया। असली भगवान श्रीकृष्ण के भक्त अत्याचारी, दुराचारी, व्यभिचारी, हो ही नहीं सकता।हमे अपने देवता के जन्मदिन को न्याय दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। कृष्ण जन्माष्टमी एक खुशी का त्योहार है जो दुनिया भर के हिंदुओं द्वारा मनाया जाता है। यह अपने प्रिय देवता के जन्म का जश्न मनाने, अपने विश्वास की पुष्टि करने और परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने का समय है।यह त्यौहार सभी भक्तों के लिए कृष्ण की शिक्षाओं पर विचार करने की शिक्षा देता है।

कृष्ण एक बुद्धिमान शिक्षक हैं जिन्होंने अपने अनुयायियों को प्रेम, करुणा और दूसरों की सेवा का महत्व सिखाया। उनकी शिक्षाएँ आज भी प्रासंगिक हैं और लोगों को अधिक पूर्ण और सार्थक जीवन जीने में मदद कर सकती है।

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